दिन पर दिन गांव से मानो जैसे तालाब लुप्त होते जा रहे हैं, इसकी सबसे बड़ी वजह तेजी से बढ़ रहे गांव की आबादी है l आज के दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के पास जमीन कम है लेकिन घर में लोगों की जनसंख्या ज्यादा है l ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी का आलम यह है कि लोग दो वक्त की रोटी खाने के लिए मुस्तैद है,ऐसे में जमीन खरीदना तो दूर की बात है l
ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ वर्ष पहले तक भारी संख्या में तालाब हुआ करते थे l जो गांव के लोगों को कपड़ा धोने के साथ-साथ और भी तमाम कार्यों में सहायक होती थी l साथ ही मांगलिक कार्यों के दौरान में तालाबों की पूजा भी की जाती थी l लेकिन समयानुसार ग्रामीण क्षेत्रों की जैसे-जैसे आबादी तेजी के साथ बढ़ती गई लोगों ने गांव के तालाबों पर कब्जा करना शुरू कर दिया l यहां तक की लोगों द्वारा तालाबों को पाटकर जमीन का विस्तार करके वहां पर मकान बना लिया गया, और शेष बचे जमीनों पर जुताई बुवाई करना शुरू कर दिए जिसके परिणाम स्वरूप धीरे-धीरे गांव से तालाबों का नामोनिशान मिटता जा रहा है l जैसे जैसे लोग गांव की संपत्तियों को नष्ट करते जा रहे हैं वैसे वैसे लोग प्राकृतिक आपदाओं के शिकार भी होते जा रहे हैं l गांव से तालाब के नष्ट हो जाने से बारिश के समय गांव की गलियों व बाजार में जब जलभराव होता है तब फिर लोगों को तालाब की याद आती है l सही रूप से अगर देखा जाए तो मनुष्य अपने दुख का कारण स्वयं होता है l अब भी समय है अगर मनुष्य गांव के धरोहर को बचाने के प्रति जागरूक नहीं होता है तो आगे चलकर इससे भी बड़ी विकट परिस्थिति उसके सम्मुख खड़ी हो सकती है l
Anand Tripathi

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