7वीं अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों की अनोखी प्रस्तुति, सैंड आर्ट में दिखा योग का महत्व l
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय दृश्य कला विभाग के मास्टर ऑफ फाइन आर्ट के छात्र अजय कुमार गुप्ता और मनोज कुमार द्वारा सैंड आर्ट बनाकर छात्रों ने योग के महत्व को दर्शाया। अजय का कहना है कि योग की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है और इसकी उत्पत्ति हजारों वर्ष पहले हुई थी। ऐसा माना जाता है कि जब से सभ्यता शुरू हुई है, तभी से योग किया जा रहा है। अर्थात प्राचीनतम धर्मों या आस्थाओं के जन्म लेने से काफी पहले योग का जन्म हो चुका था। योग विद्या में शिव को “आदि योगी” तथा “आदि गुरू” माना जाता है।
महादेव से हुआ योग का शुरुआत
भगवान शंकर के बाद वैदिक ऋषि-मुनियों से ही योग का प्रारम्भ माना जाता है। बाद में कृष्ण, महावीर और बुद्ध ने इसे अपनी तरह से विस्तार दिया। इसके पश्चात पतंजलि ने इसे सुव्यवस्थित रूप दिया। इस रूप को ही आगे चलकर सिद्धपंथ, शैवपंथ, नाथपंथ, वैष्णव और शाक्त पंथियों ने अपने-अपने तरीके से विस्तार दिया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है। यह दिन वर्ष का सबसे लम्बा दिन होता है और योग भी मनुष्य को दीर्घ जीवन प्रदान करता है।
2015 से योग को लेकर बढ़ा उत्साह
पहली बार यह दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया, जिसकी पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से की थी। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन परम्परा का एक अमूल्य उपहार है। यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है, मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य बैठाने में भी मदद होता है। विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है।
Anand Tripathi


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