प्रयाग का शाब्दिक अर्थ:- ब्रह्मा द्वारा किए गए प्रथम यज्ञ से प्रथम शब्द का पहला अक्षर "प्र" तथा यज्ञ शब्द से "याग" को लेकर प्रयाग नाम की उत्पत्ति किया गया था
पौराणिक कथाओं और हिंदू मान्यताओं के अनुसार जहां सृष्टि रचनाकार ब्रह्मा के प्रथम यज्ञ से प्रयाग की उत्पत्ति हुई तो वही प्रयाग को बसाने का मुख्य श्रेय महर्षि भारद्वाज को है बृहस्पति और ममता के सर्वश्रेष्ठ पुत्र महर्षि भारद्वाज प्रयाग के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने पूरे प्रयाग को बसाया था और ज्ञान विज्ञान, वेद पुराण, आयुर्वेद,धनुर्वेद और विमान शास्त्र के परम ज्ञानी होने के कारण उन्होंने विद्या और शिक्षा के आदान-प्रदान के लिए प्रयाग में गुरुकुल का बहुत बड़ा केंद्र बनाया था
इतिहास :- त्रेता युग में महर्षि भारद्वाज का आश्रम बालसन चौराहे के पास से बह रही गंगा तट के ठीक बगल विद्यमान था लेकिन वर्तमान समय में प्रयागराज में बक्शी बांध बन जाने की वजह से मां गंगा की दिशा को मोड दिया गया जिससे बालसन चौराहे पर स्थित भारद्वाज आश्रम गंगा तट से अब थोड़ी दूरी पर है
भारद्वाज आश्रम के ठीक बगल भारद्वाज पार्क है जहां रोड के ठीक किनारे 32 फीट के महर्षि भारद्वाज की एक 12 टन की प्रतिमा को कुंभ के दौरान स्थापित किया गया जिसका लोकार्पण भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने हाथों से किया था भारद्वाज की इस विशाल मूर्ति को इन्दौर के प्रसिद्ध कलाकार महेंद्र कोडवानी के द्वारा बनाया है।
मान्यता:-पौराणिक कथाओं रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण के अनुसार राम वन गमन के दौरान श्री राम श्रृंगवेरपुर से होते हुए प्रयाग में सर्वप्रथम लक्ष्मण और सीता के साथ गंगा तट पर बसे महर्षि भारद्वाज के आश्रम में आकर रुके थे और एक रात्रि विश्राम करने के पश्चात महर्षि के आज्ञा अनुसार त्रिवेणी में स्नान कर चित्रकूट के लिए प्रस्थान किए थे राम वन गमन के बाद श्री राम को वापस लाने के लिए उनके अनुज भरत भी चित्रकूट जाते वक्त सर्वप्रथम महर्षि भारद्वाज के आश्रम में उपस्थित होकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करके ही आगे गए थे
भारद्वाजेश्वर शिव की स्थापना महर्षि भारद्वाज ने किया था:- जानकारों के अनुसार बताया जाता है कि महर्षि भारद्वाज द्वारा प्रयाग के इस आश्रम में उनके द्वारा एक शिवलिंग की स्थापना किया गया था जिसे भारद्वाजेश्वर शिव के नाम से जाना जाता है जो आज भी इस आश्रम में मौजूद है
महर्षि भारद्वाज थे विमान के प्रथम रचनाकार:- ग्रंथों के अनुसार ज्ञान विज्ञान के महान तकनीकों के ज्ञाता महर्षि भारद्वाज द्वारा सर्वप्रथम विमान का निर्माण किया गया था आपको बता दें कि विमान निर्माण के साथ-साथ उनके द्वारा बहुत सारे यंत्रों के भी निर्माण किए थे
महर्षि भारद्वाज को प्राप्त था अमृत्व:- इंद्र एवं ब्रह्मा से आयुर्वेद और सावित्री अग्नि जैसा विद्या महर्षि भारद्वाज को प्राप्त था अग्नि के सामर्थ्य को आत्मसात कर महर्षि भारद्वाज को अमृत्व की हुई थी जिसके वजह से ऋषि भारद्वाज सर्वाधिक आयु वाले ऋषियो में से एक थे
Anand Tripathi

Very Nice for your best collection.
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद
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